ब्रह्माजी
ब्रह्माजी के अन्य नाम: प्रजापति, हिरण्यगर्भ, स्वयंभू, विधाता, चतुरानन
ब्रह्माजी की छवि: सामान्यतः ब्रह्माजी को कमल पर बैठी हुई चार सिर एवं चार हाथ वाली अवस्था में दर्शाया जाता है। एक सिर पीछे की ओर होता है जो चित्र में दिखाई नहीं देता है।
चार सिर: चार सिर चार वेदों के प्रतीक माने जाते हैं। वे चार दिशाओं को भी अभिव्यक्त करते हैं।
चार हाथ: ऐसी मान्यता है कि चार हाथ मानव स्वभाव के चार पहलुओं को दर्शाते हैं - मन, बुद्वि, अहंकार, और चेतना।
कमलासन: जिस प्रकार कमल प्रस्फुटित होता है उसी प्रकार ब्रह्म का विकास भी हुआ है। भगवान विष्णु की नाभि से कमल पर विराजित ब्रह्मा प्रकट होते हैं। अर्थात कोई केंद्रीय तत्व ऐसा है जिससे समस्त सृष्टि का प्रादुर्भाव हुआ है। कमल नाल को गर्भ नाल के प्रतीक के रूप में मानते हुए उसके माध्यम से शिशु को मां से जोड़ने का प्रतीक भी माना जाता है।
श्वेत हंस रूपी वाहन: हंस का श्वेत रंग निश्चलता का प्रतीक है। श्वेत हंस निश्चल एवं पवित्र भाव से लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गतिमान होने का प्रतीक है।
एक हाथ में कमल: कमल सृष्टि के निर्माण का द्योतक है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता हैं। कमल प्रकृति एवं जीवन का द्योतक भी है।
एक हाथ में पुस्तक: वेदों की प्रतीक पुस्तक ज्ञान का प्रतीक है यह इस बात को दर्शाती है कि ब्रह्माजी अथाह ज्ञान के स्रोत हैं।
एक हाथ में कमंडल: उनके एक हाथ में कमंडल का होना जोगी होने का द्योतक है। स्वयं सृष्टि के रचयिता हैं परंतु स्वयं के पास कुछ नहीं है। कमंडल में जल इस बात को बताता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना जल से हुई है।
एक हाथ में माला: ऐसा माना जाता है कि माला समय की गणना को बताती है।
श्वेत लंबी दाढ़ी: श्वेत दाढ़ी जीवन में अर्जित दीर्घ एवं व्यापक अनुभव को दर्शाती है। यह तपस्वी ऋषि के समान दीर्घ अनुभव का द्योतक है। यह जीवन में अनुभव से अर्जित असीमित ज्ञान का प्रतीक है। अर्थात भगवान ब्रह्माजी असीमित ज्ञान के भंडार हैं।
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