चौथ का व्रत
(वर्ष भर में चार चौथ सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि चौथ के व्रत से मनोकामना पूर्ण होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। कई महिलाएं बारह महिनों कीचौथ पर व्रत किया करती है। विशेष चौथ सहित अन्य मासिक चौथ के लिए कहानियाँ आगे इसी ब्लॉग में पूर्व में दी गईं हैं। ।चौथ का व्रत श्रीगणेशजी से संबंधित है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चौथ का व्रत के पीछे निम्नलिखित पौराणिक विवरण मिलता है जिसे संक्षेप में दिया जा रहा है।)
चौथ माता की स्थापना
चौथ माता की मूर्ति
चौथ माता की चौकी
चौथ माता की पूजन विधि -
- पूजा दिन में या सांयकाल कभी भी की जा सकती है।
- सर्वप्रथम किसी स्वच्छ स्थान पर माता की चैकी को स्थापित करें।ं
- साफ चौकी पर कंकू से स्वस्तिक बना लें। उस पर गेंहूं की ढेरी बना लें।
- ढेरी पर एक लौटे में जल लेकर कलश रखिए। कलश के चारों ओर लच्छा बांध लीजिए एवं कंकू की पांच बिंदियां लगा लें। उस पर नारियल रखने की आवश्यकता नहीं है। उसके सामने चौथ माता की मूर्ति को विराजित कीजिए।
- फिर जैसे सभी पूजा की जाती है वैसे पूजा कर लीजिए। चूरमें के लड्डू/गुड़ का हलवा/बेसन के लड्डू/मावे की मिठाई आदि किसी भी मिठाई का नैवेद्य लगा दें। बायना निकालें।
- पूजा के पश्चात कथा कर लीजिए।
- रात्रि को चंद्र दर्शन के उपरांत चंद्रमा को गेंहू की ढेरी पर रखे कलश से अर्क दिया जाता है।
- उसके पश्चात भोजन करें।
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