बुधवार, 29 अक्टूबर 2025

रुद्राक्ष : अत्यंत महत्वपूर्ण सनातनी वस्तु , Rudraksh : importance in Sanatan dharm

 रुद्राक्ष 


माहात्म्य: पुराणों एवं आयुर्वेद में रुद्राक्ष की बहुत महिमा है। यह भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है। यह परम पावन है। शिवपूजन में रुद्राक्ष का महत्व उसी प्रकार से है जैसे श्रीविष्णु पूजन में तुलसी का महत्व है। इसका उपयोग बहुत अधिक होता है।  शायद ही कोई , संत ,  साधू इसको धारण न करता हो। पहनने की माला, जाप की माला , कलाई में, गले में पहनने के रूप में आदि में इसका उपयोग होता है। 

रुद्राक्ष की उत्पत्ति : एक समय भगवान शिव दीर्घावधि तक तपस्यारत रहे। तपस्या की अवधि में उनका मन क्षुब्ध हो उठा, लीलावश  उन्होंने दोनों नेत्र खोले, इससे उनके नेत्रों से कुछ अश्रुबूंदे मथुरा, काशी , लंका, आदि जगह पर गिरी उससे रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए। रुद्र(शिव) के अक्षों(नेत्रों) से उत्पन्न होने के कारण उन वृक्षों को रूद्राक्ष की संज्ञा दी गई। 

चार रंगों के रुद्राक्ष: रुद्राक्ष चार रंगों के प्राप्त होते है- श्वेत, लाल, पीला एवं काला। इन्हें क्रमशः  ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य  एवं शुद्र द्वारा पहनने का प्रावधान किया गया है।

आकार के आधार पर रुद्राक्ष - आंवले(छोटा आंवला )  के बराबर रुद्राक्ष श्रेष्ठ श्रेणी का, बेर के बराबर वाला मध्यम श्रेणी का, तथा चने के बराबर रुद्राक्ष निम्न श्रेणी का माना जाता है।

रुद्राक्ष पहनने के फल के अनुसार उसका वर्गीकरण - रुद्राक्ष जैसे जैसे छोटा होता जाता है वैसे वैसे वह अधिक फल देने वाला होता जाता है।

रुद्राक्ष में धागा पिरोने का प्राकृतिक छेद: यदि रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से छेद हो तो वह उत्तम श्रेणी का होता है।

आकार भेद से रुद्राक्ष के प्रकार - रुद्राक्ष में धारियां होती हैं जिससे उसके खंड बनते  हैं। धारियों की संख्या के आधार पर यह चौदह प्रकार का होता है। उसी अनुरूप रुद्राक्ष धारण करने वाले को फल प्राप्त होता है। नीचे रुद्राक्ष के प्रकार. उसके लाभ तथा धारण करने के मंत्र साथ साथ दिए गए हैं।

1. एकमुखी रुद्राक्ष: मोक्षद, ओम् ह्रीं नमः  2. द्विमुखी (दो धारियां )  रुद्राक्ष: पापहर, ओम् नमः   3. त्रिमुखी(तीन  धारियां )  रुद्राक्ष: विद्या-नैपुण्य, ओम् क्लीं नमः   4. चतुर्मुखी(चार  धारियां )  रुद्राक्ष: साधन-सिद्धपद, ओम् ह्रीं नमः   5. पंचमुखी(पांच  धारियां )  रुद्राक्ष: पुरुषार्थदायक, ओम् ह्रीं नमः    6. षणमुखी(छः  धारियां )  रुद्राक्ष: सकलकामनापुरक एवं मरणोपरांत मोक्षदायक, ओम् ह्रीं हुं नमः   7. सप्तमुखी(सात  धारियां )  रुद्राक्ष: ब्रह्महत्यानाषक एवं पापषामक, ओम् हुं नमः   8. अष्टमुखी(आठ  धारियां )  रुद्राक्ष: द्रव्यदायक, ओम् हुं नमः   9. नवमुखी(नौ  धारियां )  रुद्राक्ष: दीर्घायुष्यप्रद, ओम् ह्रीं हुं नमः   10. दशमुखी(दस  धारियां )  रुद्राक्ष: शत्रुनाशक, ओम् ह्रीं नमः   11. एकादशमुखी(ग्यारह  धारियां )  रुद्राक्ष: सर्वसिद्धिदायक, ओम् ह्रीं हुं नमः  12. द्वादश मुखी(बारह  धारियां )  रुद्राक्ष: पुण्यद, ओम् क्रौं क्षौं रौं नमः  13. त्रयोदशीमुखी(तेरह  धारियां )  रुद्राक्ष: ऐश्वर्यदायक , ओम् ह्रीं नमः  14. चतुर्दषमुखी(चौदह  धारियां )  रुद्राक्ष: सौभाग्यवर्धक एवं संपूर्ण पापहारी, ओम् नमः

एकमुखी, एकादशमुखी एवं चतुर्दश मुखी रुद्राक्ष को साक्षात शिव रूप बताया गया है।

आयुर्वेद में रुद्राक्ष: शीतला, रक्तचाप, टीबी, वातरक्त, हृदय रोग आदि में इसका उपयोग होता है। इसका विभिन्न प्रकार से उपयोग किया जाता है। ऐसी मान्यता है इसको धारण करने से, इसकी माला पहनने से भी लाभ मिलता है।            


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