गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025

भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी- सिद्धिनायक व्रत- (गणेश चौथ ) Puja ,wrat ,upwas ,kathaen ,sacred symols of sanatan dharm

 भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी- सिद्धिनायक व्रत- (गणेश  चौथ ) 


(भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत किया जाता है। वस्तुतः इसे हम गणेश  चौथ  के नाम से अधिक जानते हैं। इस तिथि को चंद्र दर्शन  वर्जित है, चंद्र  दर्शन हो जाने पर मिथ्या कलंक लगने की संभावना रहती है। इसलिए इस चौथ पर चंद्र  दर्शन नहीं किए जाते जबकि अन्य चौथ पर चंद्रदर्षन कर ही व्रत खोला जाता है। )

मध्यान्ह में सिद्धिविनायक का ध्यान कर श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक पूजन करें।

1 पूजा से पूर्व नित्यानुसार स्नान, स्वयं के मस्तक पर तिलक करवा लें, लच्छा बांध लें एवं पूर्व या उत्तर  दिशा  में मुँह कर निम्नानुसार आचमन, प्राणायाम एवं ध्यान करें।

2 सर्वप्रथम शुभ मुहुर्त में दीपक एवं अगरबत्ती  प्रज्ज्वलित करलें।

3 पवित्रीकरण- ॐ अपवित्रः पवित्रों वा सर्वावस्थां गतोअपि वा। ॐ पुंडरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुंडरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुंडरीकाक्षः पुनातु का  उच्चारण करते हुए स्वयं एवं पूजन सामग्री पर पवित्र जल का छिड़काव करदें।

4 पवित्रीधारण- यदि उपलब्ध हो तो कुशकी रिंग बनाकर दाहिने हाथ की अनामिका में पहन लें।

5 आचमन -  ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः। इन मंत्रोंको बोलकर कर्पुरसे सुवासित आचमन करें। आचमन के लिए हर बार इसी सुवासित जल का उपयोग करें।

6 ॐ हृषिकेशाय नमः का उच्चारण करते हुए हाथ धोलें।

7 प्राणायाम - गायत्रीमंत्र “ओम भुर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोद्यात” का वाचन करते हुए 5 बार अनुलोम विलोम प्राणायाम करलें।

8 रक्षाद्वीप प्रज्वलन - अक्षतों पर घी का दीप रखकर प्रज्वलित करें। अगरबत्ती जला लें। 

9 शांति पाठ करें। ॐ द्यौः शांतिरन्तरिक्षः शांतिः पृथिवी शान्तिरापः शांतिरोषधयः शांति। वनस्पतयः शांतिर्विश्वे देवाः शांतिब्र्रह्म शांति सर्व शांतिः शांतिरेव शांति सा मा शांतिरेधि ॐ

10 गणपति की स्थापना एवं पूजा करें।

11 यदि पहलें से पूजित प्रतिमा नहीं है तो बाएं हाथ में अक्षत लेकर दाहिने हाथ से कुछ  अक्षत लेकर नई प्रतिमा या सुपारी पर छोड़ते हुए निम्न मंत्र का वाचन करते हुए प्राणप्रतिष्ठा करें-

ॐ मनो जूतिर्जुषता माज्यस वृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं यज्ञ समिमं दधातु। विश्वेदेवास इह मादयन्तामो प्रतिष्ठ।। ॐ अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठंतु अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च।। अस्यै देवत्व मर्चायै मामहेति च कश्चन।।  

12 गणपति-गौरी पूजन- हाथमें अक्षत लेकर गणेश जी का ध्यान करें।             ॐ सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः उच्चारण करते हुए अक्षत चढ़ादें।

 गणपतिके दाहिनी ओर भगवती गौरीका आहवान करें। उनपर अक्षत अर्पित करें।

12.1 आसनम् समर्पियामी कहते हुए आसनके पास अक्षत छोड़दें। आचमन समर्पियामी कहते हुए आचमन अर्पित करें।

12.2 स्नानम् समर्पियामी कहते हुए शुद्धजल से स्नान कराएँ।

12.3 पंचामृत स्नानम् समर्पियामी कहते हुए पंचामृतसे स्नान कराएँ।

12.4 शुद्धोदक स्नानम समर्पियामी कहते हुए शुद्धजल से स्नान कराएँ।

12.5 वस्त्रं समर्पियामी कहते हुए रोली लच्छा चढ़ाएँ। 

12.6 यज्ञोपवीत समर्पियामी कहते हुए जनेउ चढ़ाएँ एवं आचमन कराएँ।

12.7 उपवस्त्रं समर्पियामी कहते हुए यदि कोई वस्त्र हो तो या लच्छा चढ़ाएँ एवं आचमन कराएँ।

12.8 चंदनानुलेपं समर्पियामी कहते हुए चंदन चढ़ाएँ।

12.9 अक्षतं समर्पियामी कहते हुए अक्षत चढ़ाएँ।

7.12.10 पुष्पं समर्पियामी कहते पुष्प एवं माला तथा श्री गणेष के इक्कीस नाम लेकर इक्कीस प्रकार के पŸो समर्पित करें।

1. ॐ सुमुखाय नमः - शमी पत्र  2. ॐ गणाधीषाय नमः  - भंगरैया का पत्ता  3. ॐ उमापुत्राय नमः - बिल्व पत्र 4. ॐ गजमुखाय नमः - दूर्वादल 5, ॐ लंबोदराय नमः - बेर का पत्ता  6. ॐ हरसूनवे नमः - धतूरे का पत्ता   7. ॐ शूर्पकर्णाय नमः - तुलसी दल  8. ॐ वक्रतुंडाय नमः - सेम का पत्ता   9. ॐ गुहाग्रजाय नमः - अपामार्ग का पत्ता  10. ॐएक दंताय नमः - वनभंटा का पत्ता  11. ॐ हेरंबाय नमः - सिंदूर का पत्ता या चूर्ण  12. ॐ चतुर्होत्रे नमः - तेजपात 13. ॐ सर्वेषराय नमः - अगस्त्य का पत्ता  14. ॐ विकटाय नमः - कनेर का पत्ता 15. ॐ हेमतुंडाय नमः - कदली पत्र  16. ॐ विनायकाय नमः - आक का पत्ता 17. ॐ कपिलाय नमः - अर्जुन का पत्ता 18. ॐ वटवे नमः - देवदार का पत्ता 19. ॐ भालचंद्राय नमः - मरूआ का पत्ता  20. ॐ सुराग्रजाय नमः - गांधारी पत्र 21. ॐ सिद्धिविनायकाय नमः - केतकी पत्र।

यह संभव है कि हम न तो इन सभी प्रकार के पत्तों  को पहचानते हैं और न ही ये आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं। अतः जो पत्ते  उपलब्ध न हो सकें उनके स्थान पर बिल्व पत्र को समर्पित कर दें।

12.11 इसी प्रकार संबंधित वस्तु का नाम.......समर्पियामी के साथ लेते हुए अबीरं, धूपं, दीपं चढ़ाएँ। दीप के बाद हाथ धो लें।

.12.12 नैवेद्यं समर्पियामी कहते हुए गुड़ एवं मोदक(लड्डू) चढ़ाएँ एवं आचमन कराएँ।

12.13 ऋतुफलं, तांबुलम्, द्रव्य दक्षिणाम् समर्पियामी।(ये सब वस्तुएं चढ़ाएं)

12.13. आरती, कर्पुर आरती एवं शीतला आरती करें।

12 .14 पुष्पांजलि करें। 

12 .15 पूजन में जाने अनजाने रही किसी भी त्रुटि, कमी  हेतु  क्षमा याचना करें। 


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