शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

मयुर: सनातन धर्म का एक और प्रतीक Sacred Symbol of Sanatan The Peacock

 मयुर: सनातन धर्म का एक और प्रतीक 


  

प्रस्तुत की जाने वाली छवि: भगवान श्रीकृष्ण एवं मां सरस्वती के चित्र में अक्सर इसका चित्रण होता है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में मौरपंख होता ही है जो कि मयुर के महत्व को बताता है। श्रीकृष्ण के चित्र में दर्शाया  जाने वाला मोर एवं मयुर पंख प्राकृतिक सौंदर्य में आनंद से जीवनयापन करने का द्योतक है। यह प्रतीक है कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए आनंद से जीवननिर्वाह करना चाहिए।

माहात्म्य: सनातन धर्म का एक पवित्र प्रतीक है मयुर जोकि सौंदर्य, पुरुषत्व , गर्व ,गरिमा, आध्यात्मिकता एवं दिव्यता का प्रतीक है। मयुर पुनर्जन्म, विवेक, एवं संरक्षण को प्रदर्शित  करता है। सनातन धर्म में मयुर भी कई चित्रों में दिखाई देता है। ऐसी मान्यता है कि मयुर का सृजन भगवान विष्णु के वाहन गरूड़ के पंखों से हुआ है।

एक कथा के अनुसार श्रापवश  इंद्र के शरीर पर हजारों छाले हो जाने पर वह पंखों पर हजारों नेत्र सदृश्य धब्बों युक्त पक्षी बन गया।

एक अन्य कथा के अनुसार जब इंद्र रावण को युद्ध में पराजित नहीं कर पाया तो वह एक पक्षी के पंखों के पीछे छुप गया। बाद में इंद्र ने उस पक्षी को हजार नेत्र होने का वरदान दिया।

देवीय शक्तियों से संबध: 

कार्तिकेय का वाहन: भगवान शंकर के  बड़े पुत्र कार्तिकेय का वाहन है मयुर। भगवान कार्तिकेय युद्ध एवं विजय के प्रतीक हैं। कार्तिकेय  को अग्नि एवं स्वाहा का पुत्र भी माना जाता है परन्तु वाहन मयूर ही है। 

श्रीगणेश  का वाहन/आसन: श्रीगणेश  को मयुरेश्वर  भी कहा जाता है क्योंकि वे मयुरासन पर बैठे दिखाए जाते हैं।

मां सरस्वती से संबंध: मां सरस्वती के किसी किसी चित्र में मयुर भी दिखाया जाता है जो कि पूर्ण सुंदरता का द्योतक है। पूर्ण सुंदरता विवेक में अंतर्निहित होती है। 

मयुर मां लक्ष्मी का भी प्रतिनिधित्व करता है।

मयुर के पंखों में अनेक नेत्र सदृश्य  आकृतियां होती हैं जो कि दृष्टि, विवेक और अंतर्दृष्टि के द्योतक हैं।

सुंदरता एवं गरिमा का प्रतीक: मयुर सुदंरता एवं गरिमा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे सौंदर्य, लालित्य एवं स्पंदन के प्रतीक हैं।

संरक्षक: मयुर संरक्षक हैं। वे प्रतीक हैं सामर्थ्य , संरक्षण, आपदा के विरूद्ध डटकर खड़े रहने की प्रवृत्ति  का। इसी कारण मयूर युद्ध के देवता कार्तिकेय के वाहन हैं।  

आसुरी शक्तियों से रक्षा करने वााला: मयुर को सांप को मारते हुए दिखाया जाता है जो कि प्रतीक है बुराई से रक्षा करने का। इसीलिए आसुरी शक्तियांे से बचाव के लिए भी मयुर पंखों का उपयोग होता है। मयुर पार्थिव एवं दैवीय संबंध को अभिव्यक्त करते हैं। मयुर के पंखों का कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यां में उपयोग होता है।

भारत का राष्ट्रीय पक्षी: मयुर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है जिसको मारना अपराध है।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें