सोमवार, 27 अक्टूबर 2025

शंख Shankh , The Conch shell

 शंख 


माहात्म्य: सनातन धर्म में शंख को अत्यंत शुभ माना जाता है। शालग्राम एवं तुलसी के संदर्भ में शंखचूड़ का उल्लैख आया है । उसी शंखचूड़ की अस्थियों को शंख के रूप में विकसित होने का वरदान मिला था। राधिका के श्राप से सुदामा ने ही शंखचूड़ के रूप में जन्म लिया था। 

शंख की उत्पत्ति  क्रम संक्षेप में: दंभ नामक दानव के शंखचूड़ नामक पुत्र हुआ। शंखचूड़ ने देवताओं कोे पराजित किया, देवताओं ने शिवजी से विनती की, शिवजी के साथ शंखचूड़ का युद्ध होता है,  शंखचूड़ के  वध के लिए उसकी पत्नी तुलसी का शील भंग होना तथा उसका कृष्ण कवच का उतरना आवश्यक  था। ब्राह्मण रूप धर कर विष्णुजी ने शंखचूड़ का कवच उतरवा लिया, विष्णुजी द्वारा शंखचूड़ का भेष  धरकर तुलसी का शील भंग किया गया। कवच विहीन एवं पत्नी के सतीत्व के भंग होने पर कमजोर हो गए शंखचूड़ को  शिवजी ने त्रिशूल से  जलाकर भस्म कर दिया, उसकी अस्थियों से ही बने शंख, जो कि विष्णुजी को अत्यंत प्रिय हैं।

शंख: सनातन धर्म में यह एक अत्यंत पवित्र और शुभ फल देने वाला माना जाता है। शंख भगवान विष्णु द्वारा अपने चार हाथों में धारण किए  जाने वाले चार आयुध शंख , चक्र ,  गदा ,  और पद्म में से एक है।   भगवान विष्णु  इसे दाहिने हाथ में धारण करते हैं। इसे धर्म और विजय का प्रतीक माना जाता है। यह सृष्टि की आदि ध्वनि और जल तत्व का प्रतिक भी माना जाता है।  

शंख जल: शंख द्वारा चढ़ाया गया जल शंकर के अलावा सभी देवताओं के लिए प्रशस्त माना गया है। विष्णुजी एवं लक्ष्मीजी को यह जल अत्यंत प्रिय है। यह जल शंकरजी को नहीं चढ़ाया जाता है।

शंखनाद: शंख को फूंक मारकर बजाने से उत्पन्न ध्वनि को शंखनाद कहते हैं। शंखनाद सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है तथा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। यह मन को एकाग्र करने एवं साधना में सहायता करता है। आरती के दौरान यह ईश्वर  से आध्यात्मिक रूप से जुड़ने में सहायक होता है। यह बूरे लोगों चेतावनी देने एवं भक्तों को उनकी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त  करने के लिए भी शंखनाद किया जाता है।

पांचजन्य: श्रीकृष्ण शंख को पांचजन्य शंख कहा जाता है। श्रीकृष्ण इसे महाभारत युद्ध में बजाते थे।  संदीपन ऋषि ने श्रीकृष्ण से  गुरु दक्षिणा में समुद्र में डूबे अपने पुत्र को लाने के लिए कहा। समुद्र में शंखासुर को मारकर ऋषि के पुत्र को लाया गया। पांचजन्य शंखासुर के वध के उपरांत उसके खोल से प्राप्त हुआ था। इसकी ध्वनि अत्यंत शक्तिशाली थी। यह ध्वनि सैंकड़ों सिंहों की दहाड़ के समान शक्तिशाली  मानी जाती थी।  यह शक्तिशाली  ध्वनि पांडवों में उत्साह और कौरवों में भय उत्पन्न करती थी। यह शंख  विजय और धर्म की स्थापना का प्रतीक  है। 

शंख का औषधीय उपयोग: शंख भस्म पाचन क्रिया को अच्छा बनाने, गैस और एसिडिटी को शांत करने में काम आती है। चूंकि इसमें कैल्शियम  होता है अतः यह अस्थियों को मजबूत करने के लिए इस भस्म का प्रयोग  किया जाता  है।   

                           




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